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Cosmic Stories & Divine Tales

Journey through eternal wisdom with stories of gods, goddesses, and cosmic events that illuminate our spiritual path
01. मार्गशीर्ष उत्पन्ना एकादशी

🐚 01. मार्गशीर्ष उत्पन्ना एकादशी

मार्गशीर्ष ,यह वही तिथि है जब एकादशी देवी का दिव्य जन्म हुआ था—अधर्म का अंत करने और भक्तों को मोक्ष के द्वार तक ले जाने के लिए। पूजा-विधि केवल कर्म नहीं, बल्कि अंतर्मन की यात्रा है—जहाँ व्रत करने वाला धीरे-धीरे संसार की अशुद्धियों से निकलकर विष्णु की शरण में लौटता है।

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02. मोक्षदा एकादशी

🐚02. मोक्षदा एकादशी

मोक्षदा एकादशी मुक्ति, करुणा और आत्मोद्धार की तिथि है। इस दिन का व्रत न केवल स्वयं के लिए,
बल्कि– पूर्वजों, पितरों और किसी भी आत्मा के उद्धार के लिए किया जा सकता है। पूजा-विधि का हर चरण ,आपको धीरे-धीरे अधर्म, भ्रम और अज्ञान की परतें हटाते हुए आत्मिक प्रकाश तक ले जाता है।

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03. पौष कृष्ण सफला एकादशी

🐚 03. पौष कृष्ण सफला एकादशी

मार्गशीर्ष के बाद पौष की ठंडी साँझ जब नर्म चाँदनी धरती पर बिखरती है, तब देवमास की शांत लहरों में सफला एकादशी प्रकट होती है। यह वही तिथि है जब एकादशी देवी ने भक्तों को पापों से मुक्ति और धर्म के मार्ग की ओर मार्गदर्शन करने का संकल्प लिया। सफला एकादशी का व्रत केवल कर्म नहीं, बल्कि अंतरात्मा की यात्रा है—जहाँ भक्त धीरे-धीरे सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर विष्णु की शरण में लौटता है।

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04. पुत्रदा एकादशी

🐚04. पुत्रदा एकादशी

पौष मास की उजली प्रभात बेला…जब शीतल वायु में पवित्रता घुली होती है और आकाश में सूर्यदेव मृदु किरणों से धरती का आलिंगन करते हैं, उसी पावन समय पुत्रदा एकादशी का प्राकट्य होता है।
यह वह दिव्य तिथि है जो केवल संतान-सुख ही नहीं, बल्कि वंश-धर्म, पितृ-तृप्ति और आत्मिक उत्तरदायित्व का स्मरण कराती है।
पुत्रदा एकादशी का व्रत कोई साधारण कामना-व्रत नहीं— यह वह आध्यात्मिक साधना है जिसमें साधक अपने जीवन की धारा को भगवान विष्णु के चरणों की ओर मोड़ देता है।

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05. षट्तिला एकादशी

🐚 05. षट्तिला एकादशी

षट्तिला एकादशी वह पुण्यकाल है, जब सूक्ष्म कर्म-बीज (तिल) दान, तप और भक्ति द्वारा पाप से पुण्य और अंधकार से प्रकाश में परिवर्तित हो जाते हैं। यह व्रत केवल स्वयं के लिए नहीं, पितरों, भूली हुई आत्माओं और कर्मबंधन में फँसी चेतना के लिए भी किया जाता है।

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06. जया एकादशी

🐚06. जया एकादशी

जया एकादशी वह दिव्य द्वार है जहाँ आत्मा अपने ही भय, वासना और अज्ञान पर विजय (जय) प्राप्त करती है।
यह व्रत केवल उपवास नहीं — अदृश्य बंधनों से मुक्ति का शास्त्रीय उपाय है।

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07. विजया एकादशी

🐚 07. विजया एकादशी

विजया एकादशी वह दिव्य अवसर है जब धर्म, सत्य और धैर्य अधर्म, भय और विघ्नों पर विजय प्राप्त करते हैं।
यह व्रत केवल सफलता के लिए नहीं, बल्कि धर्मपूर्ण विजय के लिए किया जाता है।

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08. आमलकी एकादशी

🐚08. आमलकी एकादशी

आमलकी एकादशी केवल उपवास नहीं है। यह वह तिथि है जब विष्णु स्वयं आमलकी वृक्ष में साक्षात् निवास करते हैं। जो इस दिन आमलकी का पूजन करता है, वह देह, मन और कर्म — तीनों स्तरों पर शुद्धि प्राप्त करता है।

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09. पापमोचनी एकादशी

🐚 09. पापमोचनी एकादशी

पापमोचनी एकादशी वह तिथि है जब श्रीहरि केवल पापों को क्षमा नहीं करते, बल्कि उनके बीज तक को नष्ट कर देते हैं। यह एकादशी कर्म-बंधन काटने की तिथि है।

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10. कामदा एकादशी

🐚10. कामदा एकादशी

कामदा एकादशी का संक्षिप्त परिचय
• मास: चैत्र शुक्ल पक्ष
• देवता: भगवान श्रीहरि विष्णु
• शक्ति: मनोकामना पूर्ति, पाप नाश, दाम्पत्य व पारिवारिक दोषों का शमन
• यह एकादशी कामनाओं को शुद्ध करके पूर्ण करने वाली मानी जाती है।

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11. वरूथिनी एकादशी

🐚 11. वरूथिनी एकादशी

वरूथिनी एकादशी का परिचय
• मास : वैशाख
• पक्ष : कृष्ण पक्ष
• देवता : भगवान श्रीहरि विष्णु (वामन / त्रिविक्रम स्वरूप)
• अर्थ : “वरूथ” = कवच / रक्षा
यह एकादशी जीव को पाप, दरिद्रता, शाप और पतन से रक्षा करती है।

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12. मोहिनी एकादशी

🐚12. मोहिनी एकादशी

मोहिनी एकादशी का परिचय
• मास : वैशाख
• पक्ष : शुक्ल पक्ष
• देवता : भगवान श्रीविष्णु – मोहिनी अवतार
• तत्त्व : माया-बंधन से मुक्ति
यह एकादशी मोह, भ्रम, आसक्ति, मानसिक ग्रंथियों और कर्म-बंधन को काटने वाली मानी गई है।

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13. अपरा एकादशी

🐚 13. अपरा एकादशी

• मास : ज्येष्ठ
• पक्ष : कृष्ण पक्ष
• देवता : भगवान श्रीविष्णु
• अन्य नाम : अचला एकादशी
• तत्त्व : अपर पापों का नाश
यह एकादशी अज्ञात पाप, गुप्त दोष, बदनामी, अपयश और वाणी-दोष को नष्ट करने वाली मानी गई है।

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14. निर्जला एकादशी

🐚14. निर्जला एकादशी

निर्जला एकादशी को—
• भीमसेनी एकादशी
• पाण्डव एकादशी
भी कहा जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को होता है और इसे सभी 24 एकादशियों का संयुक्त फल देने वाला व्रत माना गया है।

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15. योगिनी एकादशी

🐚 15. योगिनी एकादशी

योगिनी एकादशी आषाढ़ कृष्ण पक्ष की एकादशी है। यह व्रत रोग, दरिद्रता, पाप, और कर्मबंधन नाश करने वाला , विशेष रूप से रोगमुक्ति और आर्थिक शुद्धि देने वाला माना गया है।

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16. पद्मा एकादशी

🐚16. पद्मा एकादशी

पद्मा एकादशी को देवशयनी एकादशी भी कहा जाता है। इसी दिन से भगवान श्रीहरि योगनिद्रा (चातुर्मास) में प्रवेश करते हैं। यह एकादशी व्रत–भक्ति–संयम का महाद्वार मानी गई है।

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17. कामिका एकादशी

🐚 17. कामिका एकादशी

कामिका एकादशी श्रावण मास की कृष्ण पक्ष में आती है। यह एकादशी विशेष रूप से—
• पाप नाश
• ब्राह्मण-हत्या समान दोष शमन
• पूर्वज दोष शांति
• विष्णु कृपा प्राप्ति , के लिए अत्यंत प्रभावशाली मानी गई है।

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18. पवित्रा पुत्रदा

🐚18. पवित्रा पुत्रदा

श्रावण शुक्ल एकादशी (पुत्रदा / पवित्रा)
1️⃣ स्नान व शुद्धता – पवित्रता का प्रथम चरण
• ब्रह्ममुहूर्त में उठें।
• गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान करें।
• सफेद या पीले वस्त्र पहनें।
• मन में संकल्प करें:
“आज मैं पुत्रदा (पवित्रा) एकादशी का व्रत अपने और अपने पितरों के कल्याण के लिए कर रहा/रही हूँ।”

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19. अजा एकादशी

🐚 19. अजा एकादशी

एक समय की बात है — सत्य, धर्म और सत्यनिष्ठा के लिए प्रसिद्ध राजा हरिश्चन्द्र सूर्यवंशी चक्रवर्ती के रूप में अपनी प्रजा का कल्याण करते थे। वे इतने सच्चे और सत्यवादी थे कि उनका वचन सबसे प्रिय और अपरिवर्तनीय माना जाता था। राजा का राज्य धन धान्य और वैभव से संपन्न था। परंतु समय की गति अपरिवर्तनीय थी — एक कठिन समय आया जब उनके लिए समाज और परिवार के साथ जीवन कठिन हो गया।

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20. परिवर्तिनी एकादशी

🐚20. परिवर्तिनी एकादशी

एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा— “हे प्रभो! भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का क्या नाम है? उसका व्रत कैसे किया जाता है और उसका फल क्या होता है?” तब भगवान विष्णु ने कहा— “हे युधिष्ठिर! भाद्रपद शुक्ल एकादशी को परिवर्तिनी (Parivartini) Ekadashi भी कहा जाता है। यह वही एकादशी है जिस दिन मैं वामन अवतार के रूप में प्रकट हुआ था। जो मनुष्य इस एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करता है, उसे वाजपेय यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। इस दिन मैंने राजा बलि को वामन रूप से जीता और धर्म की स्थापना की।”

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21. इंदिरा एकादशी

🐚 21. इंदिरा एकादशी

श्री वेदव्यासजी कहते हैं — हे राजन्! अब मैं तुम्हें इंदिरा नामक एकादशी का पुण्यमय व्रत सुनाता हूँ, जिसके प्रभाव से पितर भी नरक-बंधन से मुक्त हो जाते हैं।

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22. पापांकुशा एकादशी

🐚22. पापांकुशा एकादशी

श्रीवेदव्यासजी कहते हैं — हे राजन्! अब मैं तुम्हें पापांकुशा नामक एकादशी की पुण्यमयी कथा सुनाता हूँ, जिसके श्रवण मात्र से भी मनुष्य के अनेक पाप नष्ट हो जाते हैं।

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23. रमा एकादशी

🐚 23. रमा एकादशी

श्रीवेदव्यासजी कहते हैं — हे राजन्! अब मैं तुम्हें रमा नामक एकादशी के उत्तम व्रत की पूजा-विधि सुनाता हूँ, जिसके प्रभाव से दरिद्रता, पाप और भय नष्ट हो जाते हैं
और मनुष्य को विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।

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24. प्रबोधिनी एकादशी

🐚24. प्रबोधिनी एकादशी

(कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी — देवउठनी/देवोत्थान/देवप्रबोधिनी एकादशी)
प्रबोधिनी एकादशी को देवउठनी एकादशी, देवोत्थान एकादशी या देवप्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। यह वह पावन दिन है जब भगवान विष्णु चतुर्मास (चार महीनों की योगनिद्रा) के बाद जागते हैं। उस दिन से शुभ कर्म, विवाह, यात्राएँ और मांगलिक कार्यक्रम आरंभ मान्य होते हैं।

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25. पद्मिनी एकादशी

🐚 25. पद्मिनी एकादशी

प्रारंभिक संकल्प
ॐ श्री गणेशाय नमः।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन ग्रहण करें।

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26. परमा एकादशी

🐚26. परमा एकादशी

परमा एकादशी का संक्षिप्त परिचय
अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आती है। यह एकादशी अत्यंत दरिद्रता, पाप, ऋण, और कर्मबंधन का नाश करने वाली मानी गई है। पद्मपुराण के अनुसार यह व्रत राजा सुकेतुमान के उद्धार से प्रसिद्ध है।
प्रातःकाल स्नान व शुद्धि

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In the cosmic dance of existence, every story is a thread in the divine tapestry of consciousness. These tales are not mere narratives but living vibrations that resonate with the eternal truth within us all.

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